मित्र सबसे अनूठा,
हार्दिक भावनाओं से भरा,
छल कपट ऊंच,नीच,अमीर,गरीब,
पाप ,पुण्य से परे,
साथ देना ही कर्तव्य,
विधाता भाग्य में राज पाट,
ऐश्वर्य लिखना भूल जाए,
अपने और समाज उपेक्षा करें,
अधिकार छीन लें,
मित्र दुर्योधन ने कर्ण को,
आलिंगन कर अंगराज बनाया ,
सूत पुत्र कह प्रतियोगिता से भाग लेने से मना किया,
कर्ण को आभास था,
दुर्योधन साथ पतन की राह
सुदामा गरीबी का प्रकोप भोग रहे थे दाने दाने को मोह ताज,
फूटी कठौती,टूटी मड़ैया,
यही तकदीर,
द्वार पर सुदामा,
अगवानी को आए द्वारकाधीश ,
दशा देख नैनो में नीर,
सुदामा के तंदुल खाए चाव से,
निर्धनता को हर,
दिया धरा के वैभव,
मित्र सबसे अनूठा संबंध,
खून के रिश्ते निभाने पड़ते,
खुश करने में जीवन बीते,
फर्ज समझ अहमियत कम कर दे,
मित्र मन देख चुनते,
दुख सुख साझा करते,
जीवन का अधूरापन भर जाता,
मन रहता प्रसन्न,
मित्र की स्मृति
जीवन भर की धरोहर,
उदासियों में ठंडी हवा का झोंका,
मित्र सबसे अनूठा।
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