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भाई दूज पर एक कविता

                
                                                         
                            भैया मेरा दूज के चांद जैसा।
                                                                 
                            
नित्य करे जीवन में तरक्की।
जीवन बन जाए पूर्णिमा सा।
रहे दूर अमावस जीवन से।
सदा संग रहे संगिनी।
आशीर्वाद रहे माता,पिता का।
अन्न के भंडार भरे रहे।
काया रहे निरोगी।
होठों पर रहे मुस्कान।
यही है बहन की कामना
भैया मेरा दूज के चांद जैसा।
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करे
4 वर्ष पहले

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