आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आजादी का जश्न

                
                                                         
                            आजादी का जश्न मन रहा,
                                                                 
                            
घर घर तिरंगा फहर रहा,
मन में उमंग,
मुख पर प्रसन्नता,
संस्थानों में राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत ग़ब रहा,
आजादी का इतिहास खून से सना,
दर्द से भरा,आत्मा को कुचल गुलामी की जंजीर में जकड़ा,
पन्ने पलटे वीर वीरांगनाओं ने हंसते हंसते जान दी
महारानी लक्ष्मी बाई,चंद्रशेखर आजाद लाला लाजपतराय,भगत सिंह आजाद खुदीराम बोस,राम प्रसाद बिस्मिल आजादी की नींव,
शान से फहरा रहा तिरंगा,
भगत सिंह की फांसी पर मौन थे,
दिग्गज नेता,
ठहरा दिया बागी ,
एक मुस्लिम जज ने फांसी की सजा सुनाने से पूर्व,
दिया इस्तीफा,
जेली भी रोए, जल्लाद भी रोया
रोया सारा हिंदुस्तान,
मशाल जली आजादी की,
बच्चा बच्चा कफ़न बांध,
बना आजादी का दीवाना,
हिंदू मुस्लिम एक रंग में रंगकर,
आंदोलन में लिया भाग,
देश ने आजादी जी की फिजा में सांस ली 15अगस्त 1947को।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर