आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

चलो राधा की गली, चलो शाम की गली।              

                
                                                         
                            चलो राधा की गली, चलो शाम की गली।
                                                                 
                            
मेरे कुंज बिहारी, घनश्याम की गली ।।
चलो राधा की गली, चलो शाम की गली।।
राधा रानी का श्रृंगार करेंगे,
कान्हा के संग रास करेंगे।।
दोनों की निहारेंगे प्यारी छवि।
चलो राधा की गली, चलो शाम की गली।।
कान्हा को बुलाएंगे, राधा को बुलाएंगे।
दोनों को संग संग, झूला झुलाएंगे।।
मनोहारी छवि, राधा श्याम की।
बलिहारी जाऊं देखी प्यारी छवि।
चलो राधा की गली, चलो श्याम की गली।।
                
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर