माहिष्मती का सोया भाग्य जगाया था।
देवी का शासन स्वर्णिम युग कहलाया था।
ज्ञानी ध्यानी संतों की तपस्थली पर
दया धर्म शांति का परचम लहराया था।
चौंड़ी गाँव की बेटी, होल्कर नववधू ने
खण्डे राव का भाग्य चमकाया था।
माँ अहिल्या की जीवन बगियाँ में
मालेराव,मुक्ताबाई सा सौरभ छाया
भक्ति का पाठ पिता से चौंड़ी गाँव में
वीरता मल्हारराव ने सिखलाया था।
सेवा कर्म मन से,जीवनभर अपनाकर
होलकर वंश का, गौरव बढ़ाया था।
शिवानुरागी अहिल्या ने मालवा छोड़
माहिष्मती को राजधानी बनाया था।
समर भूमि में इक नारी का साहस देख
पेशवा ने देवी से सुलह पथ बढ़ाया था।
नारी शक्ति सेना ने,मालव प्रान्त बचाकर
राघोबा के सपनों पर,पानी फहराया था।
विद्रोह दमन पर,अबला ने सबल रूप से
राजपूत-चंद्रवतों को लोहा मनवाया था।
अचूक अभेद रण कौशल, देख नारी सेना का
फिर न किसी दुश्मन,ने सर उठाया था।
जन-कल्याणी ने,बुनकरों को बसा कर
महेश्वरी साड़ी का उधोग चला शीतांशु
न्यायप्रिया, प्रजावत्सला,अहिल्या माँ ने
विश्व में माहिष्मती का परचम लहराया है।
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