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संस्कारों की ख़ूबसूरत स्याही

                
                                                         
                            हमारे बच्चे हमारा आईना हैं
                                                                 
                            
हमारे हर व्यवहार का प्रतिबिंब हैं।

अपने धर्म और संस्कृति को
संभालने की ज़िम्मेदारी अब हमारी है।

उन्हें हक़ के लिए आवाज़ उठाना सिखाइए,
लेकिन कभी अपने या किसी के चरित्र को गिराकर नहीं।

यह केवल उनके भविष्य की नींव नहीं,
हम सबके आने वाले कल की भी बुनियाद है।

इनके मन को संस्कारों की ख़ूबसूरत स्याही से इस तरह भरिए
कि इतिहास के पन्नों में
इनके नाम की गूँज सदियों तक सुनाई दे।
-वन्दना सूद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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