है सुर, सुधा, मन का राग,
ये हिन्दी सिर्फ भाषा नही,रस अनुराग।
है सरल,सुगम आ जाए जुबान पर युही
जैसे मन का कोई साज।।
है सुर, सुधा, मन का राग,
ये हिन्दी सिर्फ भाषा नही, रस अनुराग।
हर शब्द का अपना असर है,
कुछ तो जैसे तीर-भाले और कुछ जैसे रस का पान।।
-वेद प्रकाश गुप्ता "नीलेश"
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