आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जब कवि आपस में मिलते हैं,

                
                                                         
                            जब कवि आपस में मिलते हैं,
                                                                 
                            
तो सामान्य औपचारिकताओं के बाद
यह ज़रूर पूछते हैं-
आजकल क्या कर रहे हैं ?
क्या लिख रहे हैं ?
इधर कुछ नया लिखा है आपने ?
आपकी अगली पुस्तक कब आ रही है ?
और यदि किसी कवि से
पहली बार मुलाकात हो,
तो उसकी किताबों के पन्नों से
उसके मन तक पहुंचने की
एक कोशिश शुरू हो जाती है

वे अपने अकेलेपन से बाहर निकलकर
एक-दूसरे से बातचीत करते हैं,
तो भीतर से कुछ और ऊर्जावान
हो जाते हैं
और जब विदा होते हैं,
तो मन में एक गहरा विश्वास लिए
कि अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ,
अभी भी कुछ लोग हैं
जो मनुष्यता के पक्ष में
पूरी ताकत से खड़े हैं ।

-- वेद प्रकाश तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर