जब कवि आपस में मिलते हैं,
तो सामान्य औपचारिकताओं के बाद
यह ज़रूर पूछते हैं-
आजकल क्या कर रहे हैं ?
क्या लिख रहे हैं ?
इधर कुछ नया लिखा है आपने ?
आपकी अगली पुस्तक कब आ रही है ?
और यदि किसी कवि से
पहली बार मुलाकात हो,
तो उसकी किताबों के पन्नों से
उसके मन तक पहुंचने की
एक कोशिश शुरू हो जाती है
वे अपने अकेलेपन से बाहर निकलकर
एक-दूसरे से बातचीत करते हैं,
तो भीतर से कुछ और ऊर्जावान
हो जाते हैं
और जब विदा होते हैं,
तो मन में एक गहरा विश्वास लिए
कि अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ,
अभी भी कुछ लोग हैं
जो मनुष्यता के पक्ष में
पूरी ताकत से खड़े हैं ।
-- वेद प्रकाश तिवारी
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