आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अगला क्षण किसका है ?

                
                                                         
                            सात मिलियन लोगों के भी
                                                                 
                            
सपने रहे होंगे
हमारी ही तरह,
बहुत बड़े
जो कोविड महामारी में
मौत के मुंह में समा गए,
जो अस्पतालों में
अधूरी सांसों के साथ
अपनों को छोड़ गए,

जो विमान दुर्घटनाओं में
जीवित ही जल गए,
जो नाव दुर्घटनाओं में
जल की गोद में
हमेशा के लिए सो गए,
जो भूकंप के मलबे तले
दब गए,
और जो हर दिन
किसी न किसी हादसे में
अचानक चले जाते हैं

सपनों की ऊंचाई
मृत्यु ने कभी नहीं नापी
फिर भी
हम हर रोज
अपने क़द,
अपने पद
और अपने अहंकार की
माप लेते फिरते हैं

जब अगला क्षण भी
हमारे अधिकार में नहीं,
तो यह अभिमान कैसा ?

आओ,
एक-दूसरे को छोटा करने के बजाय,
अपने होने का
थोड़ा-सा बेहतर हिस्सा
हर दिन
मानवता के नाम करते चलें ।

-- वेद प्रकाश तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर