उम्र कम निकली बहारों की
रौशनी ढह गई सितारो की
जाते हुए अलविदा न कह सके
ऐसी किस्मत न थी बेचारों की
पिता के नाम से मुझे सब जानते हैं
छत बिन कीमत नहीं दीवारों की
ब-अदब गुफ्तगू करना मेरी आदत है
उसे लगा मुझे जरूरत है सहारों की
कज़ा से पहले मेरा रुकना मुझे मंजूर न था
कस्ती को आदत न लगने दी किनारो की
-- वेद प्रभाव विदुआ
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