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निर्वाक हुआ साधक

                
                                                         
                            निर्वाक हुआ साधक, तो जगत हुआ अवाक,
                                                                 
                            
साधको की साधना अधूरी रह गई,
अपने साधक के निर्वाक में कही खो गई,
अरे हाय उन्होंने ये किसे खो दिया,
जिसके लिए थे जीते जागते,
उसने ही इस जग को छोड़ दिया,
साथ थे हाथ जोड़े, साथ में प्रभु कीर्तन करा,
सेवा में हमेशा सबने साथ में जल भरा,
कभी भूखे रहे पर भोजन प्रसाद हमेशा साथ करा,
दूर दूर यात्राओं के अनुगामी थे,
साथ ऐसा कि हर दिन हरे भरे थे,
हर एक सराय को भजन कीर्तन से भरे थे,
अरे जाने वाले लौट के आजा,
यू अनाथों को छोड़ के ना जा,
तू आजा बस तू आजा, तू आजा।
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2 घंटे पहले

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