घ्राणवान हो इधर क्यों आए हो,
यहां पहले से ही भीड़ बहुत है,
अगर प्रतीक्षा कर सको तो करनी पड़ेगी,
नाक है यहां सबके बड़े बड़े,
पर घ्राण के मामले में बहुत कम,
तुम्हे दिखानी होगी घ्राण की असली ताकत,
और ढूंढकर निकालना होगा,
इन्हीं घ्राणवानों में से कोई बेहतर घ्राणवान,
दिखता यहां सबको है, पर कोई ऐसी घ्राण
जो जल्द ग्रहण कर ले किसी की भी पीड़ा,
ढूंढकर निकालना होगा, वो तुमसे
बेहतर भी हो सकता है तो कमतर भी,
दिखने से किसी की पीड़ा का हरण नहीं हो सकता,
उसके लिए आवश्यक है घ्राण,
देश की संसद के नाक का सवाल था,
और इस देश का नाक बहुत ही बड़ा था !
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