एहसास था दर्द का
फिर भी चुप रह लिये,
बिन बताये किसी को
खुद ही सब सह लिए,
खामोस रहे इस बात से की क्या ही हो जाएगा,
ना पता था बढ़ते बढ़ते दर्द इतना बढ़ जाएगा।
- वरनजीत कौर
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