स्कूल की गलियों में जो हँसी बिखर जाती थी,
वही मस्ती आज फिर दिल में उतर आती है।
वक़्त ने सबको अपनी-अपनी राहों पर भेज दिया,
पर दोस्ती का रिश्ता कभी फीका न पड़ पाया।
जो कहीं खो से गए थे दोस्त अपने,
ढूंढ निकाला फिर से उन सबको हमने।
सीमा की सादगी, रीना की हँसी, शालिनी का साथ निराला था।
सुमन की मुस्कान, स्वाति का अपनापन, अनीता का स्नेह, शीला का दिल भी सबसे प्यारा था।
वंदना की दुआएँ, जया का साथ, हर याद आज भी दिल को महका जाती है।
शाम ढले जब वीडियो कॉल सज जाती है,
हर चेहरे पर मुस्कान खिल जाती है।
कोई बचपन की शरारत याद दिलाता है,
तो कोई बीते लम्हों का ख़ज़ाना खोल जाता है।
खट्टी-मीठी बातों का सिलसिला चलता है,
हँसी के संग कभी आँखों में पानी भी छलकता है।
कभी बच्चों की बातें, कभी घर-परिवार के किस्से,
हर पल में छिपे होते हैं अपनेपन के हिस्से।
दूर हैं सब, फिर भी लगता पास ही बैठे हैं,
दिल के सारे ग़म जैसे पल भर में सिमटे हैं।
सखियों की यह बैठक अनमोल उपहार है,
जीवन की थकी राहों का सबसे सुंदर प्यार है।
रिश्ते उम्र से नहीं, एहसासों से निभाए जाते हैं,
सच्चे दोस्त हर मोड़ पर याद आ ही जाते हैं।
वन्दना है यूँ ही हर शाम महकती रहे हमारी,
सखियों की हँसी से सजी रहे ये दुनिया सारी।
सखियाँ हों साथ तो हर पल त्योहार बन जाता है,
दोस्ती का यह रिश्ता जीवन का सबसे सुंदर उपहार बन जाता है।
जीवन का सबसे सुंदर उपहार बन जाता है।
-वन्दना श्रीवास्तव
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X