आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

फिर से महकी दोस्ती

                
                                                         
                            वर्षों की धूल जब यादों से हट गई,
                                                                 
                            
बचपन की हँसी फिर दिल में बस गई।
तब याद आती है....
स्कूल की गलियाँ, कॉलेज के वो दिन,
लगता है जैसे लौट आए हों फिर।
स्कूल के बाहर वो चूरन की खुशबू,
कच्ची केरी और अमरख की दुकान,
उसके आगे फ़िके सारे पकवान।
वो झर बेरी और आइसक्रीम का शोर,
राजकुमारी की चाट और उसकी डॉट।
टीचर का पढ़ाना औऱ अपना बहाना।
तब याद आती है......
समय ने सबको अलग राहों पर भेजा,
किसी ने सपने सँवारे, किसी ने घर सहेजा।
पर दोस्ती का धागा कभी टूटा नहीं,
बस थोड़ा-सा समय के पीछे छूटा सही।
फिर एक दिन व्हाट्सएप ने कमाल कर दिया,
बिछड़े चेहरों को फिर से एक साथ कर दिया।
एक छोटा-सा ग्रुप बना, दिलों का कारवाँ,
हर दिन खिल उठता है खुशियों का जहाँ।
तब याद आती है......
वीडियो कॉल पर जब सब मुस्कुराती हैं,
पुराने किस्सों पर ठहाके लगाती हैं।
कोई बचपन की शरारत याद दिलाती है,
कोई कॉलेज की बातें दोहराती है।
न उम्र की चिंता, न जिम्मेदारियों का बोझ,
कुछ पल के लिए हर ग़म जाता है खो।
हर हँसी में अपनापन, हर बात में प्यार,
यही तो है सच्ची दोस्ती का उपहार।
तब याद आती है.....
ईश्वर से बस इतनी-सी दुआ है हमारी,
यूँ ही महकती रहे दोस्ती की यह फुलवारी।
साथ रहे हँसी, साथ रहे यह प्यार,
जीवन भर बना रहे सहेलियों का यह परिवार।
वर्षों की धूल जब यादों से हट गई,
बचपन की हँसी फिर दिल में बस गई।

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर