रात आती है मिलने नरेंद्र खराब लेकर
चलो चलें रूठे ख्वाबों से फिर मिलने।।
शाम रंग लेकर है आयी फिर गीत यादों में
चुन लो मेरे मन गीत जो है उनसे मिलने की।।
है हौसला मेरे अंतस में जीवट की लौ भर
दिया रख है रातों-रात मैंने मन में जलाकर।।
न हो खुद परेशां और को देखता तू तुझे
ये मौत का आलम है हर इंसान यहां हैं तुझ सा।।
रख आन अपनी बातों में हिम्मतवाले लोग हैं
कल की तू सोच मत अभी मंजिल दूर है आगे।।
- वंदना झा
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