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हुए सपने

                
                                                         
                            *आज मिले अपने*
                                                                 
                            

हाथों में कंगन,
कंगन की खन-खन।
पांवों में पायल,
पायल की झन-झन।
दिल मेरा बेहाल,
दिल की धक-धक।
उर पर चुनर,
चुनर की सर-सर।
तन की गंध,
गंध की मस्त महक।
सांसों का उफान,
मन में मचा तूफान।
चंदा की चांदनी,
चांद से मिलने चली।
सच में है नादान,
रजनी पीया से मिलने।
गगन के अंगने,
लगी तारों से सजने। शबनमी मोतीयों का,
हार हम लगें गुंथने।
आज मिले अपने,
सच हुए सपने।

आज के रचनाकार
वल्लभ किशोर शर्मा
🌜🪷🌛🫧🌙
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

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