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प्यासा'के भोजपुरी दोहे

                
                                                         
                            क्षमा दया तप त्याग से,भरल जे मन अपार।
                                                                 
                            
राम रूप ऊ हृदय के,बहुत बहुत अभार।।

जे-जे दिहल हौसला, ओकरा के प्रणाम।
भला सदा उनकर करीं, रघुपति राजा राम।।

शीष झुकाईं ईश के,राखीं मन विश्वास ।
इक दिन 'प्यासा'सब मिली,होई पूरण आस।।

'प्यासा' सबकर दास जी,चाहे सबकर प्यार।
नमस्कार स्वीकार हो,हे सांचे दरबार।।

कण कण लउके रौशनी, हृदय नैन में राम।
उनका खातिर ई धरा, पूर्ण धरम के धाम।।
-विजय कुमार पाण्डेय 'प्यासा'
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एक घंटा पहले

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