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भोजपुरी साहित्य

                
                                                         
                            बात बतावत रह गईनी।
                                                                 
                            
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बात बतावत रह गईनी।
प्यार जतावत रह गईनी।

रहिआ से लोगवा के हम,
कांट हटावत रह गईनी।

फूल-फूल में भेद होला,
हम समझावत रह गईनी।

रोड के अरिआ छेहां खाति,
गाछ लगावत रह गईनी ।

सुतल अ कोहनाइल मन में,
प्रेम जगावत रह गईनी ।

जब-जब दीया ज्ञान के बुतल,
दीप जरावत रह गईनी।

सूनापन संगीत म बदले
साज बजावत रह गईनी।

जग के कम रौनक न होखे,
जगत सजावत रह गईनी।

केहू आखिर आके देखे,
का कईनी अ का धईनी,

मन के हर कोना कोना प,
गीत कढ़ावत रह गईनी।

-विजय कुमार पाण्डेय 'प्यासा'
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3 घंटे पहले

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