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दाग़-ए-ख़ामोशी

                
                                                         
                            दर्द-ए-महफ़िलों से क्या पूछना कि दाग़ किसकी बयानी है,
                                                                 
                            
दाग़दारों से पूछो तो ये अल्फ़ाज़ नहीं, ख़ामोश ज़ुबानी है।
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2 घंटे पहले

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