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काव्य–सुख

                
                                                         
                            कविता रस जो पान किया!
                                                                 
                            
साहित्य सुधा का मान किया!
तब स्वर्ग मिलेगा इसी मही पर,
जिसने काव्य–प्रपात में स्नान किया।

विभक्त देश विभक्त लोग को,
बांध कर एक करती कविता।
ना भेदभाव नाही दुराव,
रसोस्वाद से भरती कविता।

ना लघु विपुल ना एक कूल,
यह तो बहती जैसे सरिता।
जीवन पथ पूंजित है करती,
जैसे नक्षत्र दिकदर्शी सविता।

बड़ी विचित्र है बड़ी अनमोल है,
नाही इसका कोई तोल है,
यह है अदभुत अनुपम कविता।
जीवन पथ की यह है रचिता।
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3 महीने पहले

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