सन 47 में हमने आजादी
यूं ही नहीं पाई है
इसके लिए हमने कितने
"हीरों" की जान गंवाई है..
जो हंसते हंसते "चिता" पर सो गए..
"वो" अपना अपना किरदार निभा गए,
अब ये कर्तव्य हमारा है कि
हम उनके बलिदान का सम्मान रखें
और अपने अपने किरदारों से
इस देश के लिए ईमान रखें..
देश के उज्जवल भविष्य की खातिर,
विश्व में भारत की
अपने हाथों में कमान रखें..
अपने स्वार्थों से ऊंचे उठकर
राष्ट्र हित सर्वोपरि रखना है
और स्वाधीनता दिवस का सम्मान यही
कि हमें अपने झंडे का सही "मान"रखना है...
-उषा व्यास
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