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"स्कूल की यादें"

                
                                                         
                            वो घंटी बजते ही भागना क्लास में,
                                                                 
                            
टीचर के आते ही क्लास में सन्नाटा छा जाना,
बेंच पर नाम लिखना, चाक से लड़ना
टीचर के पढ़ाने पर भी छुप-छुप कर दोस्तों बातें करना।
पीटीएम का नाम सुनते ही डर जाना,
रिजल्ट वाले दिन दिल का जोर से धड़कना,
"होमवर्क करके लाए हो ?" वाला सवाल,
ओर "कल याद करके आना" वाला बवाल।
वो ग्रांउड में क्रिकेट,ब्रेक में गपशप,
प्रेयर में धक्का-मुक्की ओर लाइन में हंसी।
यूनिफार्म नहीं पहन के आना,गंदी होने का बहाना बनाना,
नाखून नहीं काटना और टीचर की डॉट खाना।
अब स्कूल भी वही हैं,
बस हम बड़े हो गए वक्त बदल गया।
मिल जाए वो दिन फिर एक बार,
मिल जाए वो दोस्त फिर एक बार,
तो कसम से फेल होना भी मंजूर है यार।
-उषा कुमारी
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2 महीने पहले

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