संसार से कई बार दिल लगाकर देख लिया
अब गोविंद के चरणों से दिल लगाकर तो देखो
तन्हाई नही सुकून है इन चरणों में
कभी संसार से मन हटाकर तो देखो।
क्यों रहते हो तनहा अपनी तन्हाइयों में
कभी अकेले में गोविंद को पुकार कर तो देखो।
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