ये मुस्कुराहटों का दौर है
लोग बेबसी से दूर भागते है
नकली मुस्कुराहटों
के पीछे भागते है
दूर दूर तक सच्चाई
नजर आती नही
आंखे बंद कर लेते है
वो तब भी सच्चे आसुओं
की कीमत को वो कहां जानते है.....
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