तन का अभिमान मत करो
तन तो धीमे धीमे मुरझा जाएगा
ये रूप ये सौंदर्य ढल जाएगा
जो कर्मो का हिसाब है
वो पीछे आएगा
रोते रहोगे कब तक
कब तक अनदेखा करोगे
जो बोया है वो फल रूप में
जरुर सामने आएगा...
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