यह जीवन चक्र है
यह जीवन चक्र है साहब यहां कर्म सभी को करना ही है
ना शिकायत है ना होगा कोई बहाना
यह डगर है साहब और हम मुसाफिर
एक-एक कदम आगे धरना ही है
मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हो
उनसे डरना नहीं है
कट जाते हैं सारे गम रास्ते में आने वाले
बरकतै खुदा अगर नियत सही है
जीने की तरकीबें निकालो
उन में उलझना नहीं है
जो बस में है उसे करो
जो ने हो उसे छोड़ दो नियति के सहारे
बेवजह जिंदगी की मजधार में फंसना नहीं है
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