आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

यह जीवन चक्र है

                
                                                         
                            यह जीवन चक्र है
                                                                 
                            

यह जीवन चक्र है साहब यहां कर्म सभी को करना ही है
ना शिकायत है ना होगा कोई बहाना
यह डगर है साहब और हम मुसाफिर
एक-एक कदम आगे धरना ही है

मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हो
उनसे डरना नहीं है
कट जाते हैं सारे गम रास्ते में आने वाले
बरकतै खुदा अगर नियत सही है

जीने की तरकीबें निकालो
उन में उलझना नहीं है
जो बस में है उसे करो
जो ने हो उसे छोड़ दो नियति के सहारे
बेवजह जिंदगी की मजधार में फंसना नहीं है

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर