आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जब शिव -शक्ति एक तो नर- नारी में भेद कहां

                
                                                         
                            "ना शंकर ने कहा कि महान, ना शक्ति ने कहा कि मैं महान,
                                                                 
                            
फिर हम क्यों अभिमानी बने, वो एक और हम क्यों चार में बटे,
जब शिव -शक्ति एक है तो नर- नारी में भेद कहां,
क्यों यह जग ना जाने बिन नर- नारी के अवशेष कहां,
जब शिव ने शक्ति को आधे हिस्से में वास दिया,
जब शिव बिन शक्ति शमशान समान,
तो हम तुम और तुम हम कहां!
क्यों यह जग ना समझे की बिन नारी -नर अधूरा,
और नर बिन नारी सूनी-सूनी,
जब रेल की दोनों प पटरी के बिना मुसाफिर अपने गंतव्य तक ना पहुंच पाए,
तब इस जीवन रूपी नैया को बिन नर -नारी कौन पर लगाए,
नारी अगर जग की जननी है, तो नर उसका रखवाला है,
दोनों के ही मिलने से, इस जग में उजाला है !
ना कोई आगे ,ना कोई पीछे दोनों बराबर चलते हैं,
जैसे एक ही दिए से, दो पवन दीपक जलते हैं!
जब शिव -शक्ति ने एक रूप धर ,जग को मार्ग दिखाया है,
फिर क्यों इंसानों ने मिलकर ,यह झूठा भेद बनाया है?
आओ मिलकर एक फिर वहीं जहान बनाएं ,
ना कोई आगे ना कोई पीछे दोनों का बराबर सम्मान हो,
जहां नर और नारी एक समान हो वही सच्चा हिंदुस्तान हो!"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर