"ना शंकर ने कहा कि महान, ना शक्ति ने कहा कि मैं महान,
फिर हम क्यों अभिमानी बने, वो एक और हम क्यों चार में बटे,
जब शिव -शक्ति एक है तो नर- नारी में भेद कहां,
क्यों यह जग ना जाने बिन नर- नारी के अवशेष कहां,
जब शिव ने शक्ति को आधे हिस्से में वास दिया,
जब शिव बिन शक्ति शमशान समान,
तो हम तुम और तुम हम कहां!
क्यों यह जग ना समझे की बिन नारी -नर अधूरा,
और नर बिन नारी सूनी-सूनी,
जब रेल की दोनों प पटरी के बिना मुसाफिर अपने गंतव्य तक ना पहुंच पाए,
तब इस जीवन रूपी नैया को बिन नर -नारी कौन पर लगाए,
नारी अगर जग की जननी है, तो नर उसका रखवाला है,
दोनों के ही मिलने से, इस जग में उजाला है !
ना कोई आगे ,ना कोई पीछे दोनों बराबर चलते हैं,
जैसे एक ही दिए से, दो पवन दीपक जलते हैं!
जब शिव -शक्ति ने एक रूप धर ,जग को मार्ग दिखाया है,
फिर क्यों इंसानों ने मिलकर ,यह झूठा भेद बनाया है?
आओ मिलकर एक फिर वहीं जहान बनाएं ,
ना कोई आगे ना कोई पीछे दोनों का बराबर सम्मान हो,
जहां नर और नारी एक समान हो वही सच्चा हिंदुस्तान हो!"
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