आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

नवरात्रि की सार्थकता

                
                                                         
                            नवरात्रि की सार्थकता
                                                                 
                            
आया नवरात्रि का त्योहार,
जगह-जगह सज रहे पंडाल,
माँ के हो रहे जयकार,
मंदिरों में घंटों की टंकार।
घरों में भजनों की भरमार,
कहीं देवी-पाठ, तो कहीं
कन्याओं के पाँव पखार,
नतमस्तक कर रहे देवी का आह्वान।
पर दूसरी ओर मासूम बच्चियों के साथ
यौन शोषण और बलात्कार के समाचार,
मानवता को कर रहे हैं आए दिन शर्मसार।
देवी मानकर पूजते नारी को,
करते हैं उसका गुणगान,
फिर क्यों नारी के प्रति
भूल जाते हैं देना सम्मान?
कुछ दिन देवी की आराधना,
कुछ दिन कन्या पूजन,
फिर नारी का उत्पीड़न क्यों?
क्यों नहीं बदलता यह आचरण?
स्त्री के प्रति भेदभाव करे परिवार,
तो कैसे साकार होंगे
नारी के अधिकार, अस्मिता और सम्मान के विचार?
अगर चाहिए माँ दुर्गा की शक्ति पूरी,
तो न करें भक्ति अधूरी।
हर नारी का हो सम्मान,
उसकी सुरक्षा का हो पुख्ता प्रावधान।
माँ की बरसे कृपा अपार,
तभी सफल होगा नवरात्रि का पावन त्योहार।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर