सर्दी की उस बारिश का जब मैने एहसास किया था,
हर लम्हा और हर पल मैने बस तुमको ही याद किया था।
सर्दी की उस बारिश का जब मैने एहसास किया था।
उस नीले नीले अम्बर पर काले बदरा घिर आने लगे ,बिजली की तेज गरज को सुन, फिर मेरा मन घबराने लगे,
तेरी बातों को, तेरी यादों को ,भीगे लम्हों ने खास किया था,
सर्दी की उस बारिश का जब मैने एहसास किया था।
फिर दिन निकला और रात हुई, पर बंद नहीं बरसात हुई,
उन सर्द हवा के झोंको ने ,तेरी यादों को मेरे पास किया था।
सर्दी की उस बारिश का जब मैने एहसास किया था।
हर लम्हा और हर पल मैने बस तुमको ही याद किया था।
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