मेरा जीवन चौखट पर लटके उन आम के पत्तों-सा है।
सूखे भी हैं, लटके भी हैं, और काम के भी हैं।
ये पत्ते अपना आकार, अपना स्वरूप बदल लेते हैं।
बदलते समय के साथ अपना रंग भी बदल लेते हैं।
एक हवा का झोंका आए, तो उड़ जाते हैं।
पत्ते ही तो हैं।
पेड़ से टूटने के बाद भी जीवन का उद्देश्य बताकर जाते हैं।
— शुभ तिवारी
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