उषा तमस की छाया लेकर छिपती हो, छिप जाए,
रुधिर रंज मे साथ निभाने, सूर्य भले ना आए,
तुम मेरी रजनी, आँखों का आँसू बनकर आना।
मन्त्रों से अभितप्त अग्नि को मंत्रमुग्ध कर जाना।।
विस्मृति तो दुर्लभ होती है, याद कटु खर भाषी,
एक चैन की निद्रा, दूजी श्वास श्वास को फांसी।
अल्प हास के मोह फास में, जड़ विस्मृत कर जाना।
तुम मेरी रजनी, आँखों का आँसू बनकर आना ।।
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