कितना अजीब है ना कुछ देर पहले
न बाहर सूकुन था ना ही भीतर
अब जैसे मानो सब कुछ थम सा गया
एक शात समुद्र की भातिर
ना कोई सवाल ना कोई जवाब
इस भाग दौड जिंदगी मे अक्सर भूल जाते है
उसे बाहर भीतर ढूंढने की कोशिश करते है
और उसे पाते है खुद के साथ मौन एकांत मे
कुछ देर के लिए सही वो हमे
एक लम्बा गहरा अहसास दे जाता है और यह जान
पाते है खुद के साथ अकेला बैठना कुछ पल के सही
उसमे थोड़ा सूकून था
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X