आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

श्री कृष्ण पर घनाक्षरी छंद

                
                                                         
                            नंदलाल, मदनगोपाल, और ब्रजपाल,
                                                                 
                            
रणछोर, बनवारी आपको प्रणाम है |

घनश्याम, राधेश्याम, सुंदर सलोने श्याम,
दामोदर, गिरिधारी आपको प्रणाम है |

कान्हा, केशव, कन्हैया, कुंज के विहारी, कृष्ण,
बांके, मुरारी, कंसारी आपको प्रणाम है |

बंशीलाल, ब्रजराज, बालमुकुंद, ब्रिजेश,
द्वारकेश, चक्रधारी आपको प्रणाम है ||

मेदिनी पे पाप का बढा हुआ है अति भार,
भारहीन हेतु अवतार लीजिए प्रभू |

लोभ मोह दर्प का शिकार हो रहा मनुष्य,
आकर के गीता वाला सार दीजिए प्रभू |

'मानस'को दीजिए सुधार के सदा विचार,
ज्ञान देके दास का उद्धार कीजिए प्रभू |

व्यभिचार अत्याचार बढ़ रहे कदाचार,
धारि के शरीर संहार कीजिए प्रभू ।
- मानस मनीष
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर