आंखों से अश्क टूटकर दिल कहा जुड़ते हे।
पतझड़ में बहारें शोलो में फूल कहा खिलते हे।
बे वफ़ा से वफ़ा की उम्मीद क्यूं करते हो यारो
बेवफा में वफ़ा ओर पत्थरों में दिल कहा मिलते हे
-मुकेश माथुर
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X