शब्द बहलाते हैं शब्द दिल भी दहलाते हैं
वेदना के स्वर हो या प्रेम का राग शब्द जीवन का हर गीत सुनाते हैं
शब्द मान है शब्द ही शान है
क्रांति का आगाज़ है तो कभी शांति का पैगाम है
जो बन ना सके हकीकत तो यह शब्द कहानी बन जाते हैं
शब्द ही मनुहार है शब्द ही हथियार है
कल्पनाओं का रूप है कभी प्रकाश का स्वरूप है
अंधेरी राहों में उजालों का पथ दिखाते हैं
कभी बाण बनकर दिल को चीर जाते हैं, तो कभी शब्द भेदी बाण दुश्मन को चौंकाते हैं
शब्द सिर्फ माया जाल नहीं विचारों का अलौकिक संसार है
जो अर्थ की अंगुली पड़कर कागजों पर मुस्कुराते हैं।
- नीता टहलयानी
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