समय का चक्र न रहता एक समान
कभी अच्छा तो कभी बुरा होता बारम्बार,
अच्छा होता तो घमड़ ला देता,
बुरा होता तो सीख सीखा जाता,
न उछलो, न कूदो इसके अच्छे रहने पर,
न कोसो, न मन में रखो कोई गिलानी इसके बुरे रहने पर,
यह समय है जनाब ये अपने आप में ही अद्भुत है
जिसे न किसी से आज्ञा मांगने की जरूरत,
न किसी से डरने की जरूरत,
यह अपने आप में एक तिजोरी है
जिसमें अहंकार का अंत भी, और
खुशियों का अम्बार भी,
-आकांक्षा गुप्ता
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