आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सच्चा मित्र

                
                                                         
                            सुख दुख में साथ निभाए
                                                                 
                            
कमियों में हाथ बढ़ाए।
बिन कहे जो जाने दिल का हाल
सच्चा मित्र वही कहलाए।

ना कोई शर्त ना व्यापार
निस्वार्थ प्रेम संग रखे दुलार।

न कोई पर्दा ना कोई दूरी
खुशियाँ जिनके बिना अधूरी।

ना कोई महफिल ना कोई भव्यता
दिल से दिल का हो सच्चा रिश्ता।

मतलब कि इस दुनिया में
जब हौसला सभी ने तोड़ा।
दोस्त ही सच्चा निकला जिसने
साथ कभी न छोड़ा।
-पायल शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर