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‘प्यासी धरती कहती है’

                
                                                         
                            धरती ने कहा मैं प्यासी हूं
                                                                 
                            
बादल से मिलन कब होगा।
एक एक पल बिलख रही हूं,
संयोग योग कब होगा ।

सुखे हैं बाग, तड़ाग सभी,
संताप मिटाना होगा।
सूखी धरती चटकी है,
मन पावन कैसे होगा।

मानव, पशु, पक्षी तपे हैं,
चिड़िया फर फर करती है।
धरती बादल जो मिलेंगे,
पुलकित तन मन फिर होगा।

धरती बादल के मिलन पर,
अंबर निनाद करते हैं।
झर झर जब अश्रु बहेंगे,
फिर पवन झकोरा लेगा।
- हेमलता ‘आशुतोष’
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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