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प्रेम एक भूल

                
                                                         
                            निज जीवन एक गाथा हो गई,
                                                                 
                            
प्रेयसी हो गई वृहद भूल।
विरह कथा पुष्प हो गई,
रूमानी संगीत हो गये शूल।

हर्ष विटप भस्म हो गये,
ना पर्ण रहे ना मूल।
यथार्थ - सत्य प्रकट हो गये,
दिवास्वप्न हो गये धूल।

- शुभम सैनी
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एक घंटा पहले

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