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शायद मुझे दे पाओगी तुम ।।

                
                                                         
                            जल चुकी है चिता मेरी,
                                                                 
                            
अब ना मैं मिलने आऊंगा ।।
बना वक्त को फरेबी अपना।
अजनबी सा मिल जाऊंगा ।।

एक दफा याद आए अगर,
न ढूंढना मुझे तस्वीरों में तुम ।।
राख अगर देखो मेरी,
तो शायद मुझे पा लोगी तुम ।।

कुछ बात अगर कहनी हो तो,
ना कहना मेरी राखो से ।।
आना मेरी समाधि पर तो,
शायद कुछ कह लोगी तुम ।।

जतलाना हो अगर प्रेम मुझे,
तो ना रुकना मेरी समाधि पर ।।
लेना मेरे चिन्हो को तो,
शायद जतला पाओगी तुम ।।

भेंट अगर देना मुझको तो,
न सीमित रहना चिन्हो पे ।।
बढ़ जाना उससे आगे तो,
शायद मुझे दे पाओगी तुम ।।

चलता हूँ इन उम्मीदो में
इन बातो में तुम ढल जाओगी ।।
बना वक्त को फरेबी अपना,
तुम भी मिलने आओगी ।।
- दीपिका सिंह
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3 घंटे पहले

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