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पांच साल का हिसाब मांगते है

                
                                                         
                            संसद तक भेजा था जिन्हें,
                                                                 
                            
आज हम उनसे 5 साल का जवाब माँगते हैं,
जनता के हक़ में जो काम किए,
उनके पाई-पाई का हिसाब माँगते हैं!
अब वादों और कागज़ी दावों से काम नहीं चलेगा हुज़ूर,
ज़मीन पर जो काम किए हैं,
आज हम उनका जवाब माँगते हैं।
वोट लेकर संसद तक तुम्हें पहुँचाया,
और तुमने हमको मूर्ख बनाया,
इसीलिए आज हम तुम्हारी आँखों में आँखें डाल ,
कर पाई-पाई का हिसाब माँगते हैं!
संसद से बाहर तो निकलो नेता जी,
अब जनता की अदालत सजी है,
उस गद्दी पर बैठकर जो भूल गए जनता को,
आज हम तुमसे पूरा हिसाब माँगते हैं।
चुप रहने का वक़्त गया,
अब हम तुमसे सरेआम जवाब माँगते हैं,
5 साल की खामोशी तोड़ो ज़ालिम,
आज हम तुमसे 5 साल का हिसाब माँगते हैं!"
 
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एक घंटा पहले

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