ओ री मेरे गांव की सड़क
मेरे बचपन से जवानी की महक
कहते हैं कि अपने बदल जाते हैं
जिंदगी के सफर में
लेकिन नहीं, तुम नहीं बदली
देखा है मैंने तुम्हें जब मैं पांच साल की थी
अब बीस की हूँ
लेकिन तुम नहीं बदली
जैसे मेंरे बचपन में थी उबड- खाबड़, टूटी-फुटी
तुम आज भी वैसी ही हो
बिलकुल नही बदली
गांव का स्कूल प्राथमिक से माध्यमिक हो गया
अब तो गांव की पंचायत का ताला भी खुल गया
गांव के सीनियर सीनियर सिटीजन हो गए
और हम ब्याह के लायक हो गए
लेकिन तुम नहीं बदली
कितने प्रयास किया हमारे नेताओं ने
लेकिन तुम मौसम थोड़ी हो जो बदल जाओगी
भाई हमारे गांव की सड़क हो
मेरे बचपन से जवानी की महक हो
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X