नियति रचती है रचना
जिम्मेदारियों से तो वक्त़ भी मोहताज हुआ
उम्र दराज है साहब यहां किसका राज हुआ है
सब नियति रचती है रचना
कोई राजा तो
कोई रोटियों के लिए मोहताज हुआ
किसी को तख्त दिया है विरासत में
किसी ने पसीनों से तख्त कमाया है
मेहनत की ताप पनपती है हाथों में
जिसने भूख में भी दूसरों को खिलाया है
नियति लिख दे जीवन में जो भी लिख दे
जीवन की कमान उसके हाथों में
कहीं चांद उतारे आंगन में
कहीं राजा रोए रातों में
कोई राजा बनकर तन्हा है
कोई झोपड़ी में भी मुस्कुराता है
कोई ताज पहन कर फकीर रहा
कोई राजा बन गया गरीबी में
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