मैं शाही दरबारों का कोई फ़रमान नहीं लिखता,
मैं प्रेमी-प्रेमिकाओं का भी अरमान नहीं लिखता।
झुका सको तो झुका लो मेरी इस बुलंद आवाज़ को,
मैं मर जाऊँगा लेकिन किसी के आगे झुकना नहीं लिखता!
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