आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मेरे घर में रंग रोगन की महक

                
                                                         
                            रंग रोगन की महक ने,
                                                                 
                            
मेरा घर का कोना कोना सजा दिया,
रंग रोगन के नूर ने,
घर की दीवारों को चमका दिया,
ये मेरे देश की माटी है जनाब,
इसकी खुशब ने हमारा घर महका दिया,
ये सिर्फ रंग रोगन नहीं है साहब,
मेरे सपनों का रंग है,
मेरी माटी का रंग है,
मेरी कलम का रंग है।
-आकांक्षा गुप्ता
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर