कभी बूंदों की फूहार, कभी हवा का तेज झोंका।
कभी मूसलाधार बारिश ने घर से निकलना रोका।
इंतजार करती कि जल्द दिखे अम्बर का मुस्कुराना।
सुनने वाले नहीं हैं, इस बार वो मेरा कोई भी बहाना।
अफसोस तो होगा मुझे भी, खोने का ऐसा मौका।
पर हकीकत है,मिलन को इस बार कुदरत ने रोका।
-श्याम कुमार "सागर":
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