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माटी की महक

                
                                                         
                            गांव की माटी की सौंधी सौंधी सी महक,
                                                                 
                            
मुझे बहुत प्यारी लगती है..........

दिन भर खेतों में बैलों का हल चलाना ,
कड़ी धूप में कृषक का पसीना बहाना ,
दो रोटी और प्याज़ का कलेवा खाना ,
सांझ ढले थक के घर लौट कर आना ,

गांव की माटी की सौंधी सौंधी सी महक ,
मुझे बहुत प्यारी लगती है.........

घर में मां का गायों का चारा पानी करना,
जंगल से लकड़ियां और घास काट लाना,
कूंए से पानी खींच कर घड़े भर कर लाना ,
चूल्हे पर लकड़ी जला कर खाना पकाना ,

गांव की माटी की सौंधी सौंधी सी महक ,
मुझे बहुत प्यारी लगती है.........

चौपाल नीम तले पंचों का हुक्का गुड़गुड़ाना,
वहीं बच्चों का आपस लुक्का छुपी खेलना ,
भोलू की बकरी का वहीं बैठे बैठे मिमियाना,
पगडंडी पर ठंडी बयार में झूम झूम चलना,

गांव की माटी की सौंधी सौंधी सी महक ,
मुझे बहुत अच्छी लगती है........

खेत, खलिहान,पौधे,फसल,बैल,हल,रहट,
कुआं,तलाब, पोखर, कुआं ,आंगन, घड़ा
हाथ की चक्की,सिल बट्टा, चूल्हा, हुक्का,
मुझे सब की रह रह कर याद सताती है,

गांव की माटी की सौंधी सौंधी सी महक ,
मुझे बहुत अच्छी लगती है........,.
-कुमकुम माथुर
 
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3 महीने पहले

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