मन की शांति ही दुनिया सबसे बड़ी संपन्नता है जनाब,
न चाहिए शीश महल जैसा बंगला,
न चाहिए बड़ी गाड़ी, सिर्फ चाहिए मन में शांति अपार,
बिना मन की शांति के ,
नोटो की तिजोरियाँ भी खाली हो जाती,
जब मन में हो शांति, तब हर मुश्किले पार हो जाती,
दूसरों के दुख को अपना समझ, उसका हल निकालना,
जब लाखों की भीड़ में अकेला होकर भी,
अकेला न होना, साहब, किसी अवॉर्ड से कम नहीं।
- रचयिता : आकांक्षा गुप्ता
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