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मैं रोकर फिर जीने लगता हूं

                
                                                         
                            जब आंखों में सावन ठहरा हो
                                                                 
                            
और बाहर मौसम सूखा हो,
जब मन के भीतर शोर बहुत हो
और होठों पर सन्नाटा हो,
जब खुद से मिलने बैठूं तो
खुद से भी मिलना मुश्किल हो,

तब आंखों में आंसू के बाढ़ अचानक आते हैं
और भीतर के भार बहा ले जाते हैं
मैं रोकर फिर जीने लगता हूं
और दुनियां बाले कायर कहते रहते हैं।।।।
- राकेश कुमार तिवारी 
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5 घंटे पहले

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